700 एकड़ में पैदा होती हैं 42 करोड़ मछलियां
मैहर: जिले के ग्राम पोड़ी में सात सौ एकड़ में फैला मत्स्य पालन केंद्र क्षेत्रफल की दृष्टि से एशिया का सबसे बड़ा मत्स्य पालन केंद्र है. इसकी स्थापना 1982-83 में की गई थी, जो प्रदेश के विभिन्न जिलों में मछली की कई नस्लों के बच्चे तैयार कर भेजता है.मछली के बच्चों को पैदा करने की प्रक्रिया साल के जून जुलाई महीने से शुरू की जाती है. प्रतिवर्ष 42 करोड़ मछली के बच्चों की पैदावार कर मध्य प्रदेश के अलावा अन्य प्रदेशों में सप्लाई की जाती है. मछलियों की कई प्रजाति प्राकृतिक व कृत्रिम प्रक्रिया से यहां पैदा होती हैं.
कतला, रोहू से लेकर मृगल तक की पैदावार
इस केंद्र में कतला, रोहू, मृगल जैसी मछलियों की पैदावार होती है. मछली की पैदावार का टारगेट विभाग द्वारा दिए गए 40 करोड़ के लक्ष्य में 32 करोड़ तक पहुंच जाता है.इसके लिए 300 हेक्टेयर में हैचरी, 69 नरसी पोखर 12 हेक्टेयर में, प्रजनन के लिए 10 तालाब 21 हेक्टेयर में, पृथक करण पोखर 4 हेक्टेयर में फैला हुआ है. इसके अलावा मैहर शहर के दो तालाब बाबा तालाब व पोड़ी तालाब को लीज में लेकर फिश बेबी पाले जा रहे हैं.
यहां पैदा होंगे 42 करोड़ मछलियों के बच्चे
सहायक संचालक मैहर एसएस बघेल ने जानकारी देते हुए बताया, '' मछली के बच्चों की पैदावार 2013 में 18 करोड़ थी, जो बढ़ा कर 2025 में 42 करोड़ की गई है. यहां पर कई नस्ल की मछलियां कतला, रोहू, मृगल, मेजर, कार्क का स्पाम तैयार किया जाता है. इसके अलावा सिल्वर कर्क, ग्रास्क कर्क, कामन कर्क, बिडिंग, पैगंसियास, पंगास न्यू ब्रीड है. बरसात में इनकी पैदावार ज्यादा मात्रा में होती है.
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