नई दिल्ली। चुनाव के बाद सरकार कर सकती है पेट्रोल-डीजल कीमतों की समीक्षा कर सकती है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड की कीमतों में तेज उतार-चढ़ाव के बावजूद सरकारी तेल कंपनियों ने पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया है। इससे उनके मार्जिन पर दबाव बढ़ गया है। तेल कंपनियों को पेट्रोल पर लगभग 18 रुपये प्रति लीटर और डीजल पर करीब 35 रुपये प्रति लीटर तक का नुकसान उठाना पड़ रहा है। मार्च में हुए भारी घाटे ने जनवरी और फरवरी के मुनाफे को लगभग खत्म कर दिया है, जिसके चलते जनवरी-मार्च तिमाही में इन कंपनियों के नुकसान में जाने की आशंका जताई जा रही है।

बढ़ सकता है कंपनीयों का घाटा

वित्तीय सेवा कंपनी मैक्वेरी की रिपोर्ट के अनुसार, कच्चे तेल की कीमत 135-165 डॉलर प्रति बैरल रहती है तो यह घाटा और बढ़ने की आशंका है। क्रूड में हर 10 डॉलर की बढ़ोतरी से प्रति लीटर नुकसान करीब 6 रुपये तक बढ़ सकता है। इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम ने अप्रैल 2022 के बाद खुदरा कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया है। मार्च तक तीनों कंपनियों का संयुक्त दैनिक नुकसान करीब 2,400 करोड़ रुपये था। केंद्र सरकार द्वारा उत्पाद शुल्क में 10 रुपये प्रति लीटर की कटौती के बाद ये घटकर रोजाना लगभग 1,600 करोड़ रह गया है। 

विकास दर घटने की आशंका

भारत की मजबूत आर्थिक बुनियाद कच्चे तेल के झटकों को काफी हद तक संभाल सकती है। हालांकि, अगर औसत मूल्य 130 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बना रहता है तो देश की आर्थिक वृद्धि दर लगभग 0.8 फीसदी कम हो सकती है। रेटिंग एजेंसी एसएंडपी के अनुसार, 2026-27 के दौरान तेल कंपनियों की परिचालन आय में 15 से 25 फीसदी तक गिरावट आ सकती है। इसके चलते कॉरपोरेट कर्ज और बैंकिंग क्षेत्र पर दबाव बढ़ सकता है। बैंकों का एनपीए बढ़कर 3.5 फीसदी तक पहुंच सकता है।