बंगाल के चुनाव की खासियत: दूसरे राज्यों के मुकाबले क्यों है अलग?
Bengal Election 2026: देश के चार राज्यों पश्चिम बंगाल, असम, केरल, तमिलनाडु और एक केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी में अप्रैल में वोटिंग होगी। इन सभी जगहों पर राजनीतिक दलों ने तैयारी तेज कर दी है। पार्टियों द्वारा अपने प्रत्याशियों की लिस्ट भी जारी की जा रही है। पांच में से सबसे ज्यादा जो चर्चा हो रही है, वह पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव को लेकर है। इस बार पश्चिम बंगाल की 294 विधानसभा सीटों पर दो चरणों में मतदान होगा। पहले चरण के लिए वोटिंग 23 अप्रैल और दूसरे चरण के लिए 29 अप्रैल को मतदान होगा। वोटों की गिनती 4 मई को होगी। दरअसल, पिछले कुछ सालों में बंगाल में चुनाव करीब 6,7 या 8 चरणों में हुए थे। लेकिन इस बार महज दो ही चरणों में मतदान हो रहा है।भले ही देश में पांच जगहों पर विधानसभा चुनाव हो रहे हैं। इनमें से बंगाल का चुनाव सबसे अलग है। बंगाल में चुनावी हिंसा एक गंभीर समस्या बनी हुई है। प्रदेश में सरपंच से लेकर लोकसभा चुनाव में खून-खराबा होना आम बात है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक चुनाव के दौरान राजनीतिक हमलों में सबसे ज्यादा पश्चिम बंगाल में लोगों की मौत होती है। इस बार भी चुनाव से पहले हिंसा दिखने को मिल गई है। दरअसल, मुर्शिदाबाद में रामनवमी जुलूस के दौरान दो समुदाय के बीच हिंसा हो गई। इस दौरान दुकानों में आग लगा दी गई और तोड़फोड़ व लूटपात भी की। इस हिंसा में कई लोग घायल हो गए।
बीजेपी के लिए अभेद किला
दरअसल, बीजेपी के लिए बंगाल अभी तक अभेद किला है। 2014 के बाद नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद देश में बीजेपी ने कई राज्यों में अपनी पकड़ मजबूत बनाई है और सत्ता हासिल की। लेकिन बंगाल का किले में सेंध नहीं लगा पाई। नरेंद्र मोदी के पीएम बनने के बाद असम और त्रिपुरा जैसे राज्यों में सरकार बनाई। वहीं दूसरी तरफ हरियाणा और बिहार में अपनी पकड़ मजबूत की। 2021 के चुनाव में बीजेपी ने बंगाल में 200 से ज्यादा सीटें जीतने के लक्ष्य से चुनाव लड़ा। लेकिन पार्टी को महज 77 सीटें मिली। भले ही पिछले विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने सरकार नहीं बनाई, लेकिन प्रदेश में अच्छा प्रदर्शन किया था। पिछले चुनाव में कांग्रेस और लेफ्ट प्रदर्शन खराब रहा। जहां प्रदेश में कभी दबदबा रखने वाली पार्टी लेफ्ट एक भी सीट नहीं जीत पाई। इस बार भी बीजेपी सत्ता पर काबिज होने के लिए हर संभव प्रयास कर रही है।
SIR को लेकर हुआ विवाद
चुनाव आयोग के स्पेशल इंटेंसिव रिवीज़न (SIR) को लेकर जमकर विवाद हुआ। सीएम ममता बनर्जी ने एसआईआर को लेकर केंद्र सरकार और चुनाव आयोग पर जमकर निशाना साधा। एसआईआर के विरोध में सीएम बनर्जी ने सड़क पर जमकर प्रदर्शन किया। इतना ही यह मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया। एसआईआर के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में ममता बनर्जी ने खुद दलीलें दी।
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