संविधान से समाजवाद और धर्मनिरपेक्ष शब्द हटाने पर बरसे अखिलेश यादव
लखनऊ । समाजवादी पार्टी के मुखिया एवं उप्र के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के बयान पर निशाना साधते हुए कहा कि जो लोग संविधान और आरक्षण के खिलाफ हैं, वे सीधे आरक्षण खत्म करने की बात नहीं कह सकते। इसलिए वे समाजवाद जैसे शब्दों को हटाने की बात करते हैं। उन्होंने कहा कि जिनका दिमाग नफरत और नकारात्मक राजनीति से भरा है, वे समाज को बांटकर, जाति और धर्म के आधार पर दीवार खड़ी करना चाहते हैं। वे समाजवाद और धर्मनिरपेक्षता के खिलाफ हैं।
शनिवार को यहां पत्रकारों से बातचीत में सपा मुखिया अखिलेश यादव ने बीजेपी के गठन के समय की बहस का जिक्र करते हुए कहा कि तब यह तय हुआ था कि बीजेपी समाजवाद और धर्मनिरपेक्षता को अपनाएगी। अगर बीजेपी अपने मूल सिद्धांतों से भटकती है, तो वह बीजेपी नहीं रह जाती। उन्होंने सीएम योगी पर तंज कसते हुए कहा कि योगी आरएसएस के बयान का समर्थन करेंगे, क्योंकि वे बीजेपी के सदस्य नहीं रहे और मजबूरी में मुख्यमंत्री बने हैं। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के चुनाव आयोग पर लगाए आरोपों पर अखिलेश ने कहा कि बीजेपी पीछे के रास्ते से कुछ भी कर सकती है। उन्होंने कुंदरकी चुनाव का उदाहरण देते हुए कहा कि सीसीटीवी में पुलिसकर्मियों के वर्दी उतारकर वोट डालने की घटना कैद हुई थी। अगर ममता बनर्जी कुछ कह रही हैं, तो इसका मतलब है कि बीजेपी कोई साजिश रच रही है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र और संविधान की रक्षा जरूरी है, वरना हमारे अधिकार खतरे में पड़ जाएंगे। बीजेपी, चुनाव आयोग से मिलकर साजिश कर रही है और विपक्ष को मिलने वाले वोटों को कम करने के लिए बूथ खत्म किए जा रहे हैं।
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